विधानमंडल का मानसून अधिवेशन टलने के आसार

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-कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों का असर
लेकिन, पिछले दो सप्ताह में बेंगलूरु में कोरोना पॉजिटिव प्रकरणों में आई तेजी ने सरकार की मंशा पर पानी फेर दिया है। फिलहाल सरकार का सारा ध्यान बिगड़ते हालात पर येन-केन प्रकारेण काबू पाने पर लगा है। सचिवालय सूत्रों का कहना है कि सरकार मानसून अधिवेशन बुलाने के बजाय नवंबर-दिसंबर में बेलगावी के सुवर्ण सौधा में 20 दिवसीय शीतकालीन अधिवेशन बुलाने पर विचार कर रही है।

बेंगलूरु. राज्य में दिनों दिन बढ़ रहे कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर विधानमंडल का मानसून अधिवेशन रद्द होने के आसार हैं।हालांकि भाजपा सरकार ने जुलाई के दूसरे सप्ताह में 10 दिवसीय मानसून अधिवेशन बुलाने पर गंभीरता से विचार किया ताकि कोरोना संक्रमण, राज्य के आर्थिक हालात और अन्य ज्वलंत समस्याओं पर दोनों ही सदनों में सार्थक बहस कराई जा सके।
लेकिन, पिछले दो सप्ताह में बेंगलूरु में कोरोना पॉजिटिव प्रकरणों में आई तेजी ने सरकार की मंशा पर पानी फेर दिया है। फिलहाल सरकार का सारा ध्यान बिगड़ते हालात पर येन-केन प्रकारेण काबू पाने पर लगा है। सचिवालय सूत्रों का कहना है कि सरकार मानसून अधिवेशन बुलाने के बजाय नवंबर-दिसंबर में बेलगावी के सुवर्ण सौधा में 20 दिवसीय शीतकालीन अधिवेशन बुलाने पर विचार कर रही है।
पिछले साल उत्तर कर्नाटक क्षेत्र में आई भारी बाढ़ के कारण बेलगावी में शीतकालीन अधिवेशन नहीं बुलाया गया था। इस बार बेंगलूरु शहर में कोरोना के बढ़ते प्रकरणों की वजह से राज्य सरकार मानसून अधिवेशन कुछ माह स्थगित कर नवंबर में लंबा सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। हालांकि कर्नाटक विधानमंडल की नियमावली के अनुसार दो अधिवेशनों के बीच 6 माह से अधिक समय का अंतर नहीं होना चाहिए और एक साल में कम से कम 60 दिन तक सत्र होना चाहिए लेकिन कोरोना महामारी से उत्पन्न विशेष परिस्थितियों का हवाला देकर सरकार मानसून सत्र टालने जा रही है।
मार्च में बजट सत्र बुलाया गया था लेकिन उसी दौरान कोरोना संक्रमण के दस्तक देने पर सरकार ने आनन-फानन बजट पारित करने के बाद समय से पहले ही सत्रावसान कर दिया था। आम तौर पर जनवरी में विधानमंडल का संयुक्त अधिवेशन, फरवरी-मार्च में बजट सत्र, जून-जुलाई में मानसून सत्र और नवंबर-दिसंबर में शीत अधिवेशन बुलाने की परिपाटी रही है। लेकिन इस साल सरकार के तमाम शिड्यूल गड़बड़ा गए हैं।कोरोना संक्रमण के कारण जहां पहली से नौंवी तक के विद्यार्थियों को परीक्षा लिए बिना उतीर्ण करना पड़ा।
अब तमाम विरोधों के बावजूद एसएसएलसी की परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। कोरोना के संक्रमण के कारण विधान परिषद की शिक्षक व स्नातक सीटों के चुनाव टालने पड़े हैं वहीं ग्राम पंचायतों के चुनाव भी टालकर पंचायतों में प्रशासनिक अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। इसी वजह से राज्य सरकार मानसून अधिवेशन बुलाने को लेकर असमंजस की स्थिति में है।
सूत्रों के अनुसार विपक्षी दल कांग्रेस जद-एस के नेताओं ने भी विधानसभा अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी से फिलहाल मानसून अधिवेशन नहीं बुलाने का अनुरोध किया है। बताया जाता है कि विधायकों की राय पर कागेरी जल्द ही सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलाकर इस मसले पर अंतिम निर्णय करेंगे। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री बी.एस. येडियूरप्पा भी विपक्ष के नेता सिद्धरामय्या व जद-एस विधायक दल के नेता एच.डी. कुमारस्वामी के साथ जल्द ही अधिवेशन स्थगित करने के मसले पर चर्चा करेंगे।
बेंगलोर से सिद्धलिंग की रिपोर्ट

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